Wednesday, September 26, 2012

अंतर्मन की आवाजें ...!!

काश अगर मैं लिख सकती....की सच में मेरे मन के अन्दर कितना कुछ चल रहा है तो शायद पूरे खाली कागज़ पर काली लकीरे ही लकीरे बिछ जाएँगी... सिर्फ लकीरे !!... बिना किसी समानता के बनायीं हुयी ..न शब्द....न वाक्य ....बस पूरे पन्ने पर एक के उपर एक खिची हुयी....अभी इस वक़्त मेरी मनः स्तिथि भी यही ही है... पूर्ण रूप से अस्त व्यस्त ...या फिर खाली सारे विचार, एक साथ एक ही समय में एक ही जगह घूम रहे है जिनका अभी तक कोई निश्चित शब्द..निश्चित वाक्य ...नहीं बन पाया ....थक गयी हूँ ...निस्तब्ध हूँ ऐसा लगता है अकेली सड़क पर खड़ी चिल्ला रही हूँ ..उन सभी सवालों के जवाब देती हुयी चिल्ला रही हूँ जो कभी उठे थे ...उन सबका हसना मुझे पागल सा बना रहा है ये मुश्किल दौर अपनी जिंदगी में कभी नहीं माँगा था, जहा पूरा समय दिल और दिमाग आपस में कलह मचाते हुए समय बीत रहे है ...हारा हुवा.. और कमज़ोर सा महसूस कर रही हूँ खुद को...इतना कमज़ोर...की अपने अंतर्मन की शोर को दो घडी रुक कर चुप हो जाने को भी नहीं बोल पा रही ...आज जिंदगी में पहली बार घर में होना अच्छा लग रहा है
पापा ने एक बार मुझसे कहा भी था ...इस दुनिया में कोई भी ऐसा नहीं जो तुम्हारे साथ तुम्हारी तकलीफों को अपना बना सके ...तुम्हारे दोस्त ...तुम्हारे अच्छे दोस्त ...यहाँ तक वक़्त आने पर तुम्हारा सबसे प्रिय भी तुम्हारा साथ छोड़ देंगे ...वो भी जिन्हें की तुम सबसे ज्यादा प्यार करती हो वो भी एक एक कर तुमसे दूर हो जायेंगे , ये लड़ाई अकेले ही लड़नी है तुम्हे ...किसी को भी अपना प्रिय मत बनाना ,आँख बूंद कर के भरोसा भी न ही करना ...ना ही किसी और के लिए दुनिया से लड़ना ...सिर्फ अपने लिए जीना !!! पर मैं भी वो सीख ज्यादा दिन गले से लगा कर जी नहीं पायी ...कितनी मूर्ख थी की भूल गयी ...छोटी सी बात ...की मेरी अपनी भी एक जिंदगी है ....दुसरो के लिए जीवन जीना कितना भारी पड़ता है ....कभी प्यार के लिए ...दोस्तों के लिए... कभी अनकहे रिश्तो के लिए ...!!
आज जब वापस मुड़ के देखती हूँ तो दुनिया को खुद पर हंसता हुआ पाती हूँ  क्यूँ की हर किसी ने जीना सीख लिया हर एक ने अपनी मंजिल तय कर ली हैं ...सीख लिया है की कैसे दूसरो से फायदा उठाया जाये ...
कुछ को नए रिश्ते , नए दोस्त भी मिल गए ...पर मैं वही खड़ी हूँ ...उसी सड़क पर...खामोश ...निस्तब्ध ...स्तम्भ सी ...मूर्खो की भाँती ...हर आने जाने वाले को निहारती ...!! उनकी खोज करती हुयी जो कल तक यही थे मेरे साथ !! पर आज कोई भी नहीं यहाँ ...वक़्त के साथ बीती आवाजें मुझे पागल बना रही है ...समझ नहीं आता दुनिया मुझ पर हंस रहीं है ??...या मैं दुनिया पर...??....

 

4 comments:

  1. kissi ke liye zingai aasan nai hoti...sab muskil dur se goojarte hain....agar apne kissi ko apna mana ek baar awaz de ke toh dekhte...shayad pehele jaisa hota....khoon se riste kabhi bemani nai hote...bus hum khoon ka rang pehchane mein galti kar dete hain...sahi ko galat aur galat ko sahi samjh bethte hain.....

    ReplyDelete
  2. apne bhaut aacha likha hain tarif ke layak hain aap....par isme likhi तुम्हारे दोस्त ...तुम्हारे अच्छे दोस्त ...यहाँ तक वक़्त आने पर तुम्हारा सबसे प्रिय भी तुम्हारा साथ छोड़ देंगे ...वो भी जिन्हें की तुम सबसे ज्यादा प्यार करती हो वो भी एक एक कर तुमसे दूर हो जायेंगे , ये लड़ाई अकेले ही लड़नी है तुम्हे ...किसी को भी अपना प्रिय मत बनाना ,आँख बूंद कर के भरोसा भी''in line ko kabhi apni zingai mein apna kar mat dekheyega plzzz...jo apne hote hain vo apne he hote hain bus unhe....

    ReplyDelete